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समाज कल्याण सचिव श्री भुवनेश यादव से मिले युवा इनोवेटर रवि किरण; दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण के लिए पेश की ‘Navinaut’ और ‘SignX’ तकनीक

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रायपुर: 25 मार्च 2026/

यूनिसेफ (UNICEF) द्वारा सम्मानित ‘ग्लोबल यूथ इनोवेटर’ और ‘एलियन इनोवेशंस’ के 21 वर्षीय संस्थापक रवि किरण ने छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाक़ात में उनके साथ स्टार्टअप में ऑपरेशंस और पार्टनरशिप की जिम्मेदारी संभाल रहीं हर्षिता भी उपस्थित थीं। विशेष बात यह है कि ये दोनों ही युवा अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के साथ-साथ इस नवाचार के जरिए समाज में बदलाव ला रहे हैं।
इस अहम मुलाक़ात का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों (PwDs) को सशक्त बनाने और उनके दैनिक जीवन को अधिक स्वतंत्र व सुलभ बनाने के लिए विकसित किए गए अत्याधुनिक उपकरणों— ‘नेविनॉट’ (Navinaut) और ‘साइनएक्स’ (SignX)— का प्रदर्शन करना था।

बैठक के दौरान सचिव श्री यादव के समक्ष इन ‘मेड इन इंडिया’ तकनीकों की कार्यप्रणाली और हजारों दिव्यांगों के जीवन में इनके सकारात्मक प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। रवि ने दृष्टिबाधित लोगों के लिए भारत का पहला टॉर्च के आकार का कॉम्पैक्ट सहायक उपकरण ‘नेविनॉट’ प्रस्तुत किया। यह उपकरण बिना पारंपरिक छड़ी के बाधा-मुक्त और सुरक्षित रूप से चलने में मदद करता है। इसमें सटीक रूप से बाधाओं का पता लगाने के लिए एडवांस्ड लिडार (LiDAR) सेंसर और अलर्ट के लिए टैक्टाइल वाइब्रेशन की सुविधा है। इसके साथ ही श्रवण एवं वाक् बाधित (मूक-बधिर) व्यक्तियों के लिए ‘साइनएक्स’ (SignX) का भी प्रदर्शन किया गया। यह स्मार्ट डेस्क-आधारित एआई (AI) उपकरण बिना किसी दुभाषिए के रीयल-टाइम संवाद को संभव बनाता है। यह 97.6 प्रतिशत सटीकता के साथ सांकेतिक भाषा को पहचानकर उसे तुरंत आवाज में बदल देता है, और ‘स्पीच-टू-टेक्स्ट’ फीचर के जरिए सामने वाले की बातों को स्क्रीन पर दिखाता है।

समाज कल्याण सचिव श्री भुवनेश यादव ने इन नवाचारों की गहरी सराहना करते हुए बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक के माध्यम से दिव्यांगजनों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना शासन की प्राथमिकताओं में से एक है। श्री यादव ने इन उपकरणों की व्यावहारिक उपयोगिता को देखते हुए भविष्य में इन्हें प्रोत्साहित करने और सार्वजनिक स्थानों, सरकारी कार्यालयों, अस्पतालों व शिक्षण संस्थानों में इनके उपयोग की संभावनाओं पर भी सार्थक विचार-विमर्श किया।

यह बैठक तकनीकी नवाचारों और सरकारी प्रयासों के समन्वय से दिव्यांग समुदाय के लिए एक समावेशी, समान और सुलभ वातावरण तैयार करने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

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