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भारत में महिला-नेतृत्व विकास- सशक्तिकरण से नेतृत्व तक

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सरकार महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही

रायपुर, / भारत में महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक रूप से स्वतंत्र, शिक्षित और समान अधिकार संपन्न बनाना है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मुद्रा योजना और महिला आरक्षण जैसे प्रयासों से निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी बढ़ी है। हालांकि, पितृसत्तात्मक सोच और सुरक्षा चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं, लेकिन शिक्षा व कानूनी सुधारों से बदलाव आ रहा है।

भारत में महिलाओं के सशक्तिकरण की सोच अब एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण में विकसित हो चुकी है, जहाँ जन्म से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और नेतृत्व तक महिलाओं की आवश्यकताओं को समग्र रूप से संबोधित किया जा रहा है। भारत सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाएँ अब केवल कल्याण तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे महिलाओं को आत्मनिर्भर और निर्णयकारी भूमिका में स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। यह बदलाव “वेलफेयर” से “एम्पावरमेंट” और अब “वूमेन-लेड डेवलपमेंट” की ओर भारत की विकास यात्रा को दर्शाता है।

स्वास्थ्य एवं पोषण के क्षेत्र में मिशन पोषण 2.0, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलों ने महत्वपूर्ण सुधार सुनिश्चित किए हैं। वर्ष 2017 से फरवरी 2026 तक प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत लगभग 4.27 करोड़ महिलाओं को 20,101 करोड़ रूपये की सशर्त सहायता प्रदान की गई है। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 7.26 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच की गई है। देशभर में 14.03 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 8.97 करोड़ से अधिक लाभार्थियों तक पोषण सेवाएँ पहुँच रही हैं, जबकि मिशन इंद्रधनुष के प्रभाव से बाल मृत्यु दर 48 से घटकर 28 और नवजात मृत्यु दर 28 से घटकर 17 हो गई है।

“पोषण भी पढ़ाई भी” कार्यक्रम के तहत 8.55 लाख कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है तथा सक्षम आंगनवाड़ी योजना के माध्यम से 1.03 लाख केंद्रों को उन्नत किया जा चुका है। वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री जन धन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और स्टैंड-अप इंडिया योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के अंतर्गत 57.93 करोड़ खातों में से 32.29 करोड़ खाते महिलाओं के नाम हैं, जो वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वितरित कुल ऋणों में लगभग 68 प्रतिशत महिलाओं को दिए गए हैं, जिनकी कुल राशि 14.72 लाख करोड़ रूपये से अधिक है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के तहत स्वीकृत ऋणों में 83 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएँ हैं, जिनकी राशि 47,704 करोड़ रूपये से अधिक है।

दीनदयाल अंत्योदय योजना, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत 10.05 करोड़ महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ चुकी हैं, जबकि “लखपति दीदी” पहल के माध्यम से 3.07 करोड़ महिलाएँ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हुई हैं। “नमो ड्रोन दीदी योजना” के तहत 1,094 ड्रोन वितरित कर महिलाओं को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।

दैनिक जीवन में गरिमा सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने व्यापक बदलाव लाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 2.90 करोड़ से अधिक घर महिलाओं के नाम आवंटित किए गए हैं, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को बल मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत 10.5 करोड़ से अधिक गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं, जिससे महिलाओं को धुएँ से मुक्ति और स्वास्थ्य लाभ मिला है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12.11 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, जिससे महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित हुई है। जल जीवन मिशन के माध्यम से 15.83 करोड़ से अधिक घरों तक नल जल की सुविधा पहुँचाई गई है, जिससे महिलाओं के दैनिक श्रम में उल्लेखनीय कमी आई है।

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